6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला आरोपी बाड़मेर से गिरफ्तार

साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए कमीशन पर दिया था बैंक खाता, मामले में अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार; म्यूल खातों से लेकर यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी तक इस्तेमाल करता था गिरोह

Sep 10, 2026 - 20:19
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6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला आरोपी बाड़मेर से गिरफ्तार

जयपुर । महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए जारी निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे अभियान के तहत राजस्थान पुलिस की केंद्रीय साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।    
    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में अग्रिम अनुसंधान के दौरान बाड़मेर निवासी तगाराम को गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया है। प्रकरण में अब तक कुल 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
साइबर ठगी की रकम खपाने के लिए तैयार था पूरा नेटवर्क
अनुसंधान एवं आरोपियों के कथनों से सामने आया कि साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने, छिपाने और अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने के लिए गिरोह द्वारा म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया जाता था।
    गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से फर्जी अथवा म्यूल बैंक खातों, एटीएम, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराता था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में आने के बाद उसे तत्काल एटीएम या चेक से नकद निकालने अथवा यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था।
कई खातों में लेयरिंग के बाद क्रिप्टो करेंसी में बदलते थे रकम
ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित कर लेयरिंग की जाती थी। इसके बाद रकम को यूएसडीटी अथवा अन्य क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित कर आगे भेजा जाता था। इसके लिए बाइनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम पर उपलब्ध क्यूआर कोड का उपयोग किया जाता था। इस तरह रकम को नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था।
    गिरोह का मुख्य तरीका वारदात फर्जी पहचान अथवा व्हाट्सऐप के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर साइबर ठगी करना, ठगी की रकम म्यूल खातों में प्राप्त करना, एटीएम, चेक, यूपीआई, सीडीएम और क्यूआर कोड के जरिए रकम को तत्काल स्थानांतरित अथवा नकद निकालना, विभिन्न बैंक खातों में लेयरिंग करना और अंत में क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से रकम को आगे भेजना था।
हरेन्द्र के कहने पर तगाराम ने उपलब्ध कराया बैंक खाता
बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर तगाराम की भूमिका सामने आई। आरोपी तगाराम ने अपना बैंक खाता दूसरे व्यक्ति हरेन्द्र उर्फ हनी को उपलब्ध कराया था। इसी खाते में 24 अगस्त 2026 को 2.50 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद तगाराम, हरेन्द्र के साथ बैंक गया और खाते से रकम निकालने का प्रयास किया।
व्हाट्सऐप से लेकर बैंकिंग ट्रांजेक्शन तक खंगाली जा रही मनी ट्रेल
पुलिस टीम द्वारा मामले में व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत अनुसंधान जारी है।
     कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन राजस्थान जयपुर के थानाधिकारी एवं उप अधीक्षक पुलिस गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक नीरज कुमार, सहायक उप निरीक्षक राकेश कुमार, हेड कांस्टेबल बृजलाल तथा कांस्टेबल सच्चिदानन्द शामिल रहे।

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SJK News Chief Editor (SJK News)