जीवन की दिशा बदलने से दशा बदलती है :आचार्य वर्धमान सागर महाराज

वर्तमान में ही क्षणिक भौतिक सुख अच्छा लगता है, मरने पर परिजन संपदा, सामग्री साथ नहीं जाती

Jul 15, 2025 - 21:40
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जीवन की दिशा बदलने से दशा बदलती है :आचार्य वर्धमान सागर महाराज

टोंक : आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने आदिनाथ जिनालय नसिया टोंक में आयोजित धर्मसभा में कहा कि आप जहां निवास करते हैं वह निवास स्थाई नहीं है । हर पर्याय, गति में आपके मकान रूपी शरीर बदलते रहते हैं, लेकिन संसारी प्राणियों को वर्तमान में ही क्षणिक भौतिक सुख अच्छा लगता है। मरने पर परिजन संपदा, सामग्री साथ नहीं जाती है। धार्मिक कार्यों से किए गए कार्यों के अनुसार पुण्य और पाप साथ जाते हैं।

इसके लिए आचार्य श्री ने सूत्र दिया कि सभी को भगवान सहित शास्त्र ओर गुरुओं के दर्शन विधि और विनय पूर्वक करना चाहिए। आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि सभी को देव, शास्त्र, गुरु के दर्शन विनय और विधिपूर्वक करना चाहिए। भगवान के समक्ष पांच पुष्प, गुरु के समक्ष तीन और जिनवाणी के समक्ष चार पुष्प चढ़ाए जाते हैं।

आप अपने अच्छे कार्यों से भगवान भी बन सकते हैं। भगवान की भक्ति और धर्म की राह अपनाने से भगवान बन सकते हैं। जीवन की दिशा बदलने से दशा बदलती है।आप (मनुष्य) आचार्य, उपाध्याय, साधु परमेष्ठी के जीवन को देखकर, अपना कर सुख प्राप्त कर सकते हैं। संतों का दर्शन, समागम, सानिध्य जरूरी है। भगवान बनने के लिए संयम और दीक्षा लेना जरूरी है।

जैन दिखना और जैन बनने में अंतर : आर्यिकाश्री

आर्यिकाश्री पूर्णिमा मति माताजी ने धर्म उपदेश ने बताया कि जैन होना, जैन दिखना और जैन बनने में अंतर है । जैन सिद्धांतों, जिनेन्द्र भगवान की वाणी का पालन करना चाहिए। अनछने पानी की एक बूंद में असंख्य जीव होते है। जैन धर्म अनुसार और वैज्ञानिक अनुसार एक अनछनी (बिना छना पानी) बूंद में 36,450 जीव होते है। सभी को आचार्य श्री समक्ष छोटे नियम व्रत लेना चाहिए।

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SJK News Chief Editor (SJK News)