रेगिस्तान में उठा रेत का महा बवंडर

फतेहपुर शेखावाटी सीकर व चुरू मे धूल ही धूल भयंकर आधी

May 31, 2026 - 02:45
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रेगिस्तान में उठा रेत का महा बवंडर

फतेहपुर शेखावाटी ।  राजस्थान के चुरू,सीकर व बिकानेर मे रेत का महा बवंडर उठा जिससें दिन मे ही रात हो गई । रेतीले बंवडर का सामना हुआ। गर्मी बढ़ने के साथ  दो-तीन दिन से हल्की आंधियों का दौर तो चल रहा था, लेकिन आज दोपहर को आए बवंडर से उठे धूल के गुबार ने पूरे फतेहपुर शेखावाटी  को अपने आगोश में ले लिया।  रामगढ़ शेखावाटी सहित अन्य कई स्थान पर रेतीले बवंडर के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। हर तरफ धूल का साम्राज्य नजर आ रहा था। चुरू से निकल कर यह बवंडर सीकर जिले में प्रवेश कर गया। 
राजस्थान के चार जिलो में शनिवार  शाम आए बवंडर ने जमकर तबाही मचाई। इस  गर्मी के दिनों में रेगिस्तानी क्षेत्रों में धूल भरे बवंडर आते रहते है। समुद्र में तेज हवा के कारण लहरे ऊपर उठना शुरू कर देती है। और हवा की गति बढ़ने पर ऊपर उठने वाली लहरें तूफान बन जाती है। इसी तर्ज पर रेगिस्तान में चलने वाली हवा यहां फैले रेत के समन्दर में लहरे बना देती है। तेज हवा के साथ इन लहरों की ढीली धूल ऊपर उठ बवंडर का रूप धारण कर लेती है। रेगिस्तान में उठने वाले ये बवंडर कई बार मीलों लम्बे होते है। ये बवंडर जिस तरफ से होकर गुजरते है वहां पर सिर्फ धूल का सामाज्य ही नजर आता है।

रेगिस्तानी क्षेत्र में चलने वाली हवा की गति जब रफ्तार पकड़ती है तो यह अपने साथ जमीन की सतह से ढीली धूल कणों को उड़ाना शुरू कर देती है। हवा की रफ्तार का यह क्रम बरकरार रहने पर धूल कणों की मात्रा बढ़ती जाती है और यह धूल आसमान में छा जाती है। तेज हवा के साथ आगे बढ़ती ये धूल एक बवंडर का रूप धारण कर लेती है। इस कारण कुछ दूरी तक देख पाना भी मुश्किल हो जाता है। हर तरफ धूल का साम्राज्य नजर आता है। चेहरे व कपड़ों से लेकर प्रत्येक वस्तु पर धूल जम जाती है। बहुत हल्की इस धूल की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह आसानी से झड़ जाती है। रेगिस्तान में मिट्‌टी की जमीन पर पकड़ मजबूत नहीं होने के कारण धूल भरी आंधियों का दौर चलता रहता है।

 इस कारण आते है बवंडर

ज्यादातर रेगिस्तान भूमध्य रेखा के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायुमंडलीय दबाव बहुत अधिक होता है। यह दबाव ऊंचाई पर मौजूद ठंडी शुष्क हवा को जमीन तक लाता है। इस दौरान सूरज की सीधी किरणें इस हवा की नमी समाप्त कर देती है। नमी समाप्त होने से यह हवा बहुत गर्म हो जाती है। इस कारण बारिश नहीं हो पाती है और जमीन शुष्क व गर्म हो जाती है।जमीन गर्म होने के कारण नमी के अभाव में धूल के कणों की आपस में पकड़ नहीं रह पाती है। ऐसे में ये हवा के साथ बहुत आसानी से ऊपर उठना शुरू कर देते है। हवा की गति चालीस किलोमीटर से अधिक होने पर ये धूल कण एक बवंडर का रूप धारण कर लेते है। बवंडर के साथ धूल कण दस से पचास फीट की ऊंचाई तक उठते है। कई बार ये इससे भी अधिक ऊंचाई तक पहुंच जाते है।

 ऐसा है थार का रेगिस्तान

 थार के रेगिस्तान से प्रसिद्ध ग्रेट इंडियन डेजर्ट भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है। यह प्राकृतिक रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा का कार्य करता है। थार रेगिस्तान तीन लाख बीस हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका 85 फीसदी हिस्सा भारत में व शेष पाकिस्तान में है। देश में रेगिस्तान के कुल हिस्से का साठ फीसदी राजस्थान में फैला हुआ है।

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SJK News Chief Editor (SJK News)