मानसरोवर के इंजीनियर्स कॉलोनी जैन मंदिर में मनाया “उत्तम आकिंचन धर्म”
जयकारों के साथ हुआ श्रीजी का कलशाभिषेक एवं विधान पूजन शुक्रवार को मनाया जाएगा “उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म एवं अनंत चतुर्दशी” का पावन पर्व, हजारों जैन श्रद्धालु रखेंगे निर्जल उपवास, 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य भगवान के मोक्षकल्याणक पर चढ़ाएंगे निर्वाण लड्डू, जैन प्रतिष्ठान रहेंगे बंद
जयपुर। मानसरोवर न्यू सांगानेर रोड स्थित इंजीनियर्स कॉलोनी के दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ दशलक्षण महापर्व मनाया जा रहा है। गुरुवार को दशलक्षण पर्व के नवें दिवस “उत्तम आकिंचन धर्म” की आराधना तीर्थंकर भगवानों के जयकारों और गुणगान के साथ की गई। इस अवसर पर प्रातः 6 बजे से मूलनायक शांतिनाथ भगवान का स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य के साथ विधान पूजन किया तथा उत्तम आकिंचन धर्म के अष्ट द्रव्य अर्पित किए।
अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि शुक्रवार को दशलक्षण महापर्व का दसवां एवं अंतिम दिवस होगा। इस अवसर पर “उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म” एवं “अनंत चतुर्दशी” का पावन पर्व मनाया जाएगा। साथ ही जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य भगवान के मोक्षकल्याणक पर्व के अवसर पर निर्वाण कांड के गुणगान एवं मंत्रोच्चार के साथ जयमाला अर्घ्य अर्पित कर निर्वाण लड्डू चढ़ाया जाएगा।
*उन्होंने बताया कि* दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन प्रातः 6 बजे जैन श्रावक-श्राविकाएं विधान पूजन करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 12:15 बजे से 24 तीर्थंकर भगवानों का पूजन किया जाएगा। पूजन संपन्न होने के बाद शाम से पूर्व जैन मंदिरों में श्रीजी का कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की जाएगी तथा पुण्यार्जक समाज श्रेष्ठी परिवार को श्रीजी की माला पहनाकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बड़ी संख्या में जैन श्रावक-श्राविकाएं निर्जल उपवास रखेंगे। इस दिन अनेक जैन समाजजन अपने प्रतिष्ठान भी बंद रखकर धार्मिक आराधना एवं तप में सहभागी बनेंगे।
“किंचित भी पर पदार्थ स्वीकार नहीं करना ही आकिंचन धर्म”
शास्त्रों में वर्णित उत्तम आकिंचन धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि आकिंचन का अर्थ है— *किसी भी बाहरी पदार्थ को अपना न मानना और मोह-ममता के बंधन से मुक्त होना। उन्होंने कहा कि मनुष्य वस्त्र आदि का त्याग कर दे, लेकिन यदि भीतर परिग्रह और ममता का भाव बना रहे तो वास्तविक त्याग नहीं हो सकता। किंचित भी पर पदार्थ को अपना न मानना और स्वीकार नहीं करना ही उत्तम आकिंचन धर्म का सार है।*
उन्होंने कहा कि मोह और परिग्रह मनुष्य को संसार के बंधनों में बांधते हैं। इसलिए आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना के लिए बाहरी त्याग के साथ-साथ मन के भीतर से भी “मेरा” और “मैं” के भाव का त्याग आवश्यक है।
दशलक्षण के 10 उपवास और झर के तेले की तपस्या करने वालों का शनिवार को होगा पारणा
अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद बाकलीवाल ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के अवसर पर जयपुर की विभिन्न कॉलोनियों में बड़ी संख्या में जैन श्रावक-श्राविकाएं दस दिनों के निर्जल उपवास कर जिनेंद्र प्रभु की भक्ति एवं आराधना में लीन हैं। इसके साथ ही अनेक श्रद्धालु तीन दिनों तक चलने वाले “झर के तेले” का निर्जल उपवास भी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इन सभी त्यागी वृत्तियों का पारणा शनिवार को करवाया जाएगा। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा तपस्वियों के तप की अनुमोदना की जाएगी।
रविवार को मनाया जाएगा क्षमावाणी पर्व
राष्ट्रीय सचिव प्रमोद बाकलीवाल ने बताया कि रविवार को दशलक्षण महापर्व के समापन के पश्चात क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन श्रावक-श्राविकाएं जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना करेंगे। क्षमावाणी पर्व के माध्यम से आपसी कटुता, वैमनस्य और बुराइयों का अंत कर प्रेम, सद्भाव एवं मैत्री का संदेश दिया जाएगा तथा धर्म की प्रभावना को आगे बढ़ाया जाएगा।
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