तन-मन की शुद्धता की तरह धर्म और कर्म में भी शुद्धता जरूरी है — आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी
भांकरोटा जैन मंदिर का दो दिवसीय वार्षिक मेला संपन्न, श्रद्धालुओं ने किए पार्श्वनाथ भगवान के कलशाभिषेक एवं विधान पूजन
जयपुर। अजमेर रोड स्थित भांकरोटा के अतिशय क्षेत्र दिगंबर जैन मंदिर का दो दिवसीय वार्षिक मेला रविवार को कलशाभिषेक, शांतिधारा, विधान पूजन, सामूहिक गोठ और महामंगल आरती के साथ संपन्न हुआ। मेले के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पार्श्वनाथ भगवान की आराधना की। रविवार सुबह 7:15 बजे मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान का स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक किया गया।इसके पश्चात आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी के मुखारविंद से वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने शांतिधारा अर्घ्य समर्पित करते हुए विश्व में शांति और जनकल्याण की मंगल भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी ने कहा कि जिस प्रकार तन को स्वच्छ और मन को निर्मल रखना जरूरी है, उसी प्रकार धर्म और कर्म में भी शुद्धता आवश्यक है। धर्म केवल मंदिर जाने, पूजा-पाठ करने या माला फेरने तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों की पवित्रता, वाणी की मधुरता और व्यवहार की सरलता ही सच्चे धर्म की पहचान है। यदि पूजा करने के बावजूद मन में द्वेष, व्यवहार में छल-कपट और कर्मों में अशुद्धता है, तो आत्मचिंतन जरूरी है। धर्म की सुंदरता दिखावे में नहीं, बल्कि भावों की पवित्रता में है। प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे कर्म करने चाहिए, जिनसे दूसरों का भला हो।
अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी ससंघ के सानिध्य में सुबह 11:15 बजे विधान पूजन प्रारंभ हुआ। श्रावक-श्राविकाओं ने मंडल शुद्धि एवं कलश स्थापना के पश्चात मंत्रोच्चार और भक्तिभाव के साथ जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल एवं महार्घ अर्पित कर जिनेंद्र भगवान की पूजा-अर्चना की। इस दौरान मेला संयोजक नगेंद्र सेठी, महेंद्र जैन सहित मंदिर व्यवस्था से जुड़े सदस्यों एवं महिला मंडल की सदस्याओं ने मानसरोवर, कमला नेहरू नगर, डीसीएम, वैशाली नगर, निर्वाण नगर, इंजीनियर्स कॉलोनी और वर्धमान सरोवर सहित विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का तिलक, माला और साफा पहनाकर स्वागत-सम्मान किया। श्रद्धालुओं ने आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी के पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए तथा मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। विधान पूजन के पश्चात समाज की सामूहिक गोठ आयोजित हुई। शाम को महामंगल आरती के साथ दो दिवसीय वार्षिक मेले का विधिवत समापन हुआ।
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