युवा संसद में अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने साझा किए अनुभव

: भारतीय युवा संसद के 31वें सिल्वर जुबली सेशन के दौरान देशभर से आए प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की

Sep 20, 2026 - 19:25
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युवा संसद में अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने साझा किए अनुभव
युवा संसद में अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने साझा किए अनुभव
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युवा संसद में अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने साझा किए अनुभव
युवा संसद में अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने साझा किए अनुभव

जयपुर -  भारतीय युवा संसद के मंच पर देश के अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं को न सिर्फ भारतीय लोकतंत्र की व्यवस्था और उसकी कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला, बल्कि अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और सामाजिक जीवन को करीब से जानने का भी मौका मिला। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों की विशेषताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस तरह के मंच युवाओं को अपनी बात रखने के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों को समझने का अवसर देते हैं। तीन दिन तक चला संवाद और लोकतंत्र पर मंथन : भारतीय युवा संसद के 31वें सिल्वर जुबली सेशन के दौरान देशभर से आए प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम में युवाओं को जनप्रतिनिधियों, संवैधानिक पदों पर रहे लोगों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिला। तीन दिनों के इस आयोजन का समापन युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्र निर्माण और समानता के मुद्दों से जोड़ने के संदेश के साथ हुआ। समारोह में मौजूद अतिथियों ने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने और देश के भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

संवाद से सुसंवाद और सुसंवाद से मैत्री के रास्ते निकलते- राज्यपाल हरिभाऊ बागडे


"भारतीय युवा संसद" के उद्घाटन सत्र में  राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सबके लिए न्याय, शांति, विकास और मानवाधिकारों के प्रति समर्पित होकर कार्य करना ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा आधार है। लोकतंत्र का अर्थ ही है, विकास में सभी नागरिकों की समान भागीदारी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संवाद से सम्पन्न होता है। संवाद से सुसंवाद और सुसंवाद से मैत्री के रास्ते निकलते हैं। उन्होंने भारत को विश्व का सबसे युवा राष्ट्र बताते हुए कहा कि युवा ही भारत की शान है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में युवाओं को सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। बागडे मंगलवार को इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में आयोजित "भारतीय युवा संसद" कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना है तो हमें न्याय नीति से चलना होगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अच्छी बातों को आत्मसात करें, यही जीवन भर काम आएगी। अच्छी बातों को ग्रहण करने से विवेक जागृत होता है। विवेक से ही समाज में प्रतिष्ठा बनती है। राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजों ने 1921 में दिल्ली में 80 लाख व्यय कर हमारे पुराने संसद भवन का निर्माण प्रारंभ किया और छह साल में इसे पूरा किया। इससे पहले अंग्रेज राइटर हाउस, कलकता से सारे आदेश निकलते थे। यह निर्माण सौ साल को ध्यान में रखते हुए किया गया। इसीलिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सुनियोजित रूप में विचार कर देश के लिए नए संसद भवन का निर्माण करवाया। संसद केवल निर्मित भवन नहीं लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। 
संविधान वहां का देवता है। यह भावना जिसके मन में रहेगी वह कभी संसद में असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने युवाओं को संसदीय लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में कार्य करने पर जोर दिया। बागडे ने कहा कि लोकतंत्र में विश्वास अर्जित करना जरूरी है। विश्वास के साथ लोकतंत्र में समझदारी होना जरूरी है। समझदारी ही सबसे बड़ा सदगुण है। उन्होंने युवाओं को इन सबको आत्मसात करने का आह्वान किया।
इससे पहले गुजरात सरकार में राज्य मंत्री रिवाबा जाडेजा ने लोकतंत्र में साझा समझ विकसित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को युवा धन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी से देश तेजी से आगे बढ़ेगा।

सिस्टम और सरकार का उत्तरदायी और जिम्मेदार होना जरूरी- रिवाबा जडेजा 


"भारतीय युवा संसद" के रजत जयंती अधिवेशन के अवसर पर युवाओ से गुजरात शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा ने कहा  देश की युवा पीढ़ी के आंदोलनों को लेकर उन्होंने कहा कि "पीढ़ी-दर-पीढ़ी आकांक्षाएं बदलती हैं। मैं मिलेनियल रही, तो हमारी आकांक्षाएं अलग थीं। इसी तरह से हर पीढ़ी की आकांक्षाएं पहले भी थीं और अब भी रहेंगी, इसलिए सिस्टम और सरकार का उत्तरदायी और जिम्मेदार होना पहले की तरह अब भी जरूरी है।" उन्होंने कहा कि अगर सवालों को दबाया जाएगा, तो और ज्यादा सवाल खड़े होंगे, लिहाजा जरूरी है कि उन सवालों को एक सुधार के रूप में सिस्टम में शामिल किया जाए। जड़ेजा ने कहा कि पीएम मोदी ने भी कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही इसी तरीके को अपनाया है, जिसमें वह हर पीढ़ी से मुलाकात के दौरान उनसे जुड़े सवाल करते हैं। उनका कहना है कि कृष्ण आज होते, तो क्या सीख देते और युवाओं की ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में किस तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है, आज इस पर विचार करने की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर जानें सच्चाई: उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि जो कुछ भी आप सोशल मीडिया पर देखते या समझते हैं, उसकी सच्चाई से रूबरू होना बेहद जरूरी है। इस काम को एजुकेशन सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। जहां तक इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिक रोटियां सेंकने का सवाल है, तो उनके पास संवैधानिक दायरे में बात रखने का एक माध्यम था। संसद या विधानसभा के जरिए भी वे दल इस बात को रखकर बिल ला सकते थे, लेकिन उनका मानस ऐसा नहीं था, जबकि इससे युवा पीढ़ी को फायदा होता। इन राजनीतिक दलों को सोचना चाहिए कि वे विकास के रास्ते पर युवाओं को लेकर जाना चाहते हैं या फिर भ्रमित करके उनकी राह भटकाना चाहते हैं। वे युवा पीढ़ी के मसले को हल करना चाहते हैं या फिर सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा फैलाकर सियासी खेल रच रहे हैं, उन्हें इसका जवाब देना होगा।


लैंगिक समानता और लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भूमिका - राज्यपाल कविंद्र गुप्ता


हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और जम्मू कश्मीर के वरिष्ठ भाजपा नेता रहे कविंद्र गुप्ता ने इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में युवाओं से संवाद करते हुए अपने जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र किया और धारा 370 को लेकर बात की। उन्होंने लैंगिक समानता और लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भूमिका के योगदान को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। कई ऐतिहासिक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा, सरकार अपनी नीतियां युवाओं और महिलाओं को केंद्रित कर बना रही है। युवाओं को भी इसे सशक्त बनाने के लिए सवाल पूछना चाहिए।
 हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि साल 2018 में जब जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिराई गई, तब उनके उप मुख्यमंत्री रहते हुए ही सरकार से समर्थन लिया गया था। जम्मू कश्मीर में सरकार गिरने के कारण ही धारा 370 को हटाना संभव हुआ। आज जम्मू कश्मीर में युवा वंदे मातरम भी गाता है और आज की युवा की सोच बदल गई है। उन्होंने बताया कि एक दौर था, जब पत्थरबाजी के बीच भारत विरोधी नारे घाटी में गूंजते थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है। कश्मीर की सूरत बदल गई है।
पार्टी ने टिकट काटा, लेकिन संवाद में किया स्थापित: कविंद्र गुप्ता ने बताया कि किस तरह से उन्हें पहली मर्तबा विधायक का टिकट मिला तो उस असेंबली में कभी भाजपा प्रत्याशी नहीं जीता था। इस चुनौती को उन्होंने संवाद के जरिए लोकतांत्रिक तरीके से जीत में तब्दील किया। इसके बाद धारा 370 हटाने के बाद जब चुनाव हुए तब उन्हें टिकट नहीं मिला और चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद जब प्रधानमंत्री प्रचार के लिए जम्मू आए तो उनसे हुई बात में भी टिकट नहीं मिलना और चुनाव नहीं लड़ने का किस्सा सामने आया था। गुप्ता ने युवाओं को बताया कि उनके संवाद की ताकत ने ही आज इन युवाओं के समक्ष उन्हें राज्यपाल के रूप में खड़ा किया है।

युवा संसद जैसे कार्यक्रम लगातार होने चाहिए : नुमाल मोमीन


 असम विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर नुमाल मोमीन ने भी युवा संसद के आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहने चाहिए, क्योंकि इससे युवाओं को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है।
मोमीन ने कहा कि युवा संसद जैसे मंचों पर युवा अपने सवाल रखते हैं और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं। युवाओं का इस तरह के संवाद में शामिल होना सकारात्मक पहल है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन के अवसर पर शुभकामनाएं भी दीं।

युवा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में निभाएंगे भूमिका -राज्यपाल थावरचंद गहलोत

समापन सत्र को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि यूथ पार्लियामेंट के माध्यम से देशभक्ति का माहौल बनाने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर इंडियन यूथ पार्लियामेंट की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उससे आज के युवा भी इस लक्ष्य से जुड़ रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी और राष्ट्र निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों से भारत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि युवा देश की शक्ति हैं और आने वाले समय में देश के विकास की जिम्मेदारी भी युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवाओं की ऊर्जा, विचार और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।

युवाओं ने संवाद के माध्यम से भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने का प्रयास किया- जोशी
भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष जोशी ने कहा कि तीन दिनों तक चले कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने संवाद के माध्यम से भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि युवा संसद का उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने के साथ उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका के लिए जागरूक करना है।
युवा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में निभाएंगे भूमिका : समापन सत्र को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि यूथ पार्लियामेंट के माध्यम से देशभक्ति का माहौल बनाने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर इंडियन यूथ पार्लियामेंट की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उससे आज के युवा भी इस लक्ष्य से जुड़ रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी और राष्ट्र निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों से भारत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि युवा देश की शक्ति हैं और आने वाले समय में देश के विकास की जिम्मेदारी भी युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवाओं की ऊर्जा, विचार और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।


कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों की विशेषताओं को साझा किया

भारत को देखने का नया नजरिया मिला : अरुणाचल प्रदेश से आए प्रतिभागी खुमजुम ने बताया कि युवा संसद का कार्यक्रम उनके लिए काफी जानकारीपरक रहा। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और अन्य अतिथियों से मिलने और उनके अनुभव सुनने का अवसर मिला। इससे उन्हें भारतीय लोकतंत्र की व्यवस्था को समझने में काफी मदद मिली।
असम के युवाओं ने साझा की राज्य की विविधता : असम से आए प्रतिभागी देहरासन अरदरी ने कहा कि जयपुर आकर भारतीय युवा संसद में भाग लेना उनके लिए अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने भारतीय युवा संसद के आयोजन के लिए आभार जताया और कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि देश के अलग-अलग राज्यों में समाज किस तरह काम करता है और वहां के लोगों का दृष्टिकोण क्या है। उन्होंने कहा कि असम की भौगोलिक स्थिति भी उसे विशेष बनाती है।


मणिपुर के युवा ने बताया राज्य का खास आकर्षण : मणिपुर से आए प्रतिभागी आरके किरब ने कहा कि उत्तर पूर्व भारत से एक प्रतिभागी के रूप में भारतीय युवा संसद में शामिल होना उनके लिए काफी अच्छा अनुभव है। अलग-अलग राज्यों के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान उन्हें उनकी संस्कृति, खान-पान और परंपराओं के बारे में जानने का मौका मिला। राजस्थान में पहली बार आने पर यहां के खान-पान और रहन-सहन से जुड़ी कई ऐसी बातें जानने को मिलीं, जो उनकी अपनी संस्कृति से अलग हैं। उन्होंने देश के लोगों से मणिपुर घूमने की अपील की।
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक भी दिखी : छत्तीसगढ़ से आईं प्रतिभागी विप्राशी पाठक ने भारतीय युवा संसद के अनुभव को लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस मंच के जरिए उन्हें अलग-अलग राज्यों से आए लोगों को जानने और समझने का अवसर मिला।
युवाओं को चाहिए अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच : महाराष्ट्र के पुणे से आई प्रतिभागी ने कहा कि भारतीय युवा संसद में शामिल होकर उन्हें काफी बेहतर अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के पास नए विचार हैं और नई चीजें खोजने की क्षमता भी हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उन्हें अपनी प्रतिभा और विचारों को सामने रखने के लिए सही मंच मिले।


त्रिपुरा के प्रतिभागी ने बताई सीमावर्ती राज्य की पहचान : त्रिपुरा से आए सुमन पॉल ने बताया कि उनका राज्य भौगोलिक रूप से काफी महत्वपूर्ण स्थिति में है। त्रिपुरा की सीमाएं तीन तरफ अलग-अलग राज्यों और बांग्लादेश से जुड़ी हैं- दो तरफ बांग्लादेश, एक तरफ असम और दूसरी तरफ मिजोरम। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा संसद में वह उत्तर पूर्वी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें दूसरे राज्यों से आए प्रतिभागियों से अपने राज्य के हेरिटेज और संस्कृति के बारे में बातचीत करने का अवसर मिल रहा है।
प्रतिभागियों ने बताया कि अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं के साथ संवाद के दौरान उन्हें न केवल अपने राज्य को दूसरे नजरिए से देखने का मौका मिला, बल्कि देश के अन्य हिस्सों के लोगों की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को भी समझने का अवसर मिला।

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SJK News Chief Editor (SJK News)