दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मनाया गया उत्तम सत्य धर्म

सत्य बोलने, सत्य आचरण और मधुर वाणी का दिया संदेश, श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में हुए विभिन्न धार्मिक आयोजन

Sep 20, 2026 - 20:21
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दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मनाया गया उत्तम सत्य धर्म

धौलपुर। जैन समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत रविवार, 20 सितंबर 2026 को पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। 1008 श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कमेटी, धौलपुर की ओर से 16 से 25 सितंबर तक आयोजित दस दिवसीय महापर्व के दौरान प्रतिदिन एक उत्तम धर्म के आध्यात्मिक स्वरूप और जीवन में उसके महत्व पर चिंतन किया जा रहा है। दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मनाया जाने वाला उत्तम सत्य धर्म व्यक्ति को सत्य बोलने के साथ-साथ सत्य का आचरण करने, छल-कपट से दूर रहने और वाणी में संयम रखने की प्रेरणा देता है। जैन दर्शन में सत्य धर्म का संबंध केवल सच बोलने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि ऐसा सत्य बोलने पर जोर दिया जाता है जो हितकारी, संयमित और अहिंसक हो।

उत्तम सत्य का सरल अर्थ है—सत्य को अपनाना और असत्य से दूर रहना। जैन दर्शन के अनुसार झूठ, छल, कपट और धोखे से व्यक्ति के भीतर अशांति तथा कर्मबंध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उत्तम सत्य धर्म व्यक्ति को प्रेरणा देता है कि वह परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य का साथ न छोड़े। साथ ही सत्य बोलते समय अपनी वाणी पर संयम रखना भी आवश्यक है, क्योंकि ऐसा सत्य जो किसी को अनावश्यक रूप से चोट पहुंचाए, वह धर्म की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता। धार्मिक चिंतन के दौरान श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि सत्य केवल शब्दों में नहीं, बल्कि विचार, व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। व्यक्ति को झूठ, दिखावे, छल-कपट और गलत जानकारी से बचते हुए ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास करना चाहिए 

महापर्व के पांचवें दिन 1008 श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, धौलपुर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की धार्मिक गतिविधियां शुरू हुईं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन-अर्चना में सहभागिता की। मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान की आराधना की और उत्तम सत्य धर्म के आध्यात्मिक महत्व को समझने का प्रयास किया। इसके साथ ही तत्त्वार्थ सूत्र वाचन एवं धार्मिक कक्षा के माध्यम से जैन धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा की गई। धार्मिक अध्ययन के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्य, संयम, सदाचार और अहिंसक वाणी के महत्व के बारे में बताया गया। उत्तम सत्य धर्म का संदेश केवल झूठ न बोलने तक सीमित नहीं है। व्यक्ति की वाणी में सत्य के साथ संयम, विनम्रता और विवेक होना भी आवश्यक माना गया है।

कई बार व्यक्ति अपने स्वार्थ, भय या किसी लाभ के कारण सत्य से दूर हो जाता है। उत्तम सत्य धर्म व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों में भी सत्य और ईमानदारी का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। धार्मिक संदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में झूठ, छल-कपट, अपमानजनक भाषा और अनावश्यक विवाद से बचें तथा सत्य, सद्भाव और संयम को अपनाने का प्रयास करें। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बाद शाम को मंदिर परिसर में श्रीजी की संगीतमय आरती, शास्त्र वाचन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ आरती में भाग लिया। रात्रि में आयोजित धार्मिक गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं में भी समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बच्चों, युवाओं और समाज के अन्य सदस्यों की भागीदारी से मंदिर परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।  दस दिनों में दस उत्तम धर्मों पर हो रहा चिंतन दशलक्षण महापर्व के दौरान दस दिनों में दस उत्तम धर्मों के माध्यम से आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया जाता है

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SJK News Chief Editor (SJK News)