जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के ऊर्जा संरक्षण एवं विद्युत बचत के संकल्प को साकार करने की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री श्री झाबर सिंह खर्रा के निर्देशन में प्राधिकरण द्वारा द्रव्यवती नदी पर स्थित 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं 2 गार्डन की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए द्वारा यह कार्य Rajasthan Renewable Energy Corporation Limited (RRECL) के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना की कुल क्षमता 5 मेगावाट है। परियोजना के तहत RRECL को 11 वर्षों तक ₹536.12 प्रति किलोवाट प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जाएगा, जिसमें परियोजना का 25 वर्षों तक संचालन एवं रख-रखाव भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि परियोजना से प्रतिदिन औसतन 20,000 यूनिट, प्रतिमाह लगभग 6 लाख यूनिट तथा प्रतिवर्ष लगभग 72 लाख यूनिट सौर ऊर्जा उत्पादन का अनुमान है। विद्युत की औसत दर ₹8.50 प्रति यूनिट मानने पर प्रतिवर्ष लगभग रुपए 6.12 करोड़ की विद्युत बचत संभावित है।
11 वर्षों की भुगतान अवधि में सकल विद्युत बचत लगभग रुपए 67.32 करोड़ तथा RRECL को लगभग रुपए 35.38 करोड़ भुगतान के बाद अनुमानित शुद्ध आर्थिक लाभ लगभग रुपए 31.94 करोड़ रहेगा। भुगतान अवधि पूर्ण होने के बाद भी अनुबंध के अनुसार परियोजना का संचालन एवं रख-रखाव 25 वर्षों तक जारी रहेगा, जिससे आगामी वर्षों में भी जेडीए को सौर ऊर्जा से होने वाली बचत का लाभ प्राप्त होगा।
सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक विद्युत स्रोतों पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 5,227 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी तथा 25 वर्षों में लगभग 1.31 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
महाजन बताया कि यह परियोजना जेडीए की ग्रीन एनर्जी, ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे द्रव्यवती नदी से संबंधित एसटीपी एवं गार्डन की विद्युत आवश्यकता के एक बड़े हिस्से की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा से होगी तथा प्राधिकरण के दीर्घकालीन विद्युत व्यय में कमी आएगी।